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Patna News: बिहार बोर्ड के अफसर के तीन ठिकानों पर EOU की छापेमारी, 3.43 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का आरोप

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के उप निदेशक अजय कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर EOU की छापेमारी, आय से अधिक संपत्ति के मामले में दस्तावेजों की जांच।

पटना, 20 अगस्त। बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (BBOSE) के उप निदेशक अजय कुमार सिंह से जुड़े तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अधिकारी ने अपनी ज्ञात आय के मुकाबले 3 करोड़ 43 लाख 78 हजार 300 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है।

EOU की कार्रवाई को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी को अधिकारी की संपत्ति और आय के बीच बड़े अंतर से जुड़े तथ्य मिले थे। प्रारंभिक जांच के बाद मामले को आगे बढ़ाते हुए विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद EOU की अलग-अलग टीमों ने पटना और बेगूसराय में एक साथ कार्रवाई शुरू की।

जांच की पहली कड़ी पटना स्थित उस आवास से जुड़ी है, जहां अधिकारी का ठिकाना बताया गया है। खाजपुरा इलाके में बीवी कॉलेज के पास आकाशवाणी रोड स्थित चन्द्रतारा भवन में EOU की टीम ने तलाशी ली। यह क्षेत्र राजीव नगर थाना इलाके में आता है। यहां जांच टीम द्वारा संपत्ति, बैंकिंग लेन-देन, जमीन-मकान से जुड़े कागजात और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल किए जाने की बात सामने आई है।

दूसरी टीम बिहार बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन के मिठापुर स्थित कार्यालय पहुंची। यहां अधिकारी के कार्यालय कक्ष की तलाशी ली जा रही है। BBOSE बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अधीन स्वायत्त संस्था है और इसका कार्यालय पटना के मिठापुर स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी परिसर में है।

EOU की तीसरी टीम बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के परोरा गांव स्थित अजय कुमार सिंह के पैतृक मकान पर पहुंची। यहां भी टीम द्वारा संपत्ति और आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी के अनुसार, अजय कुमार सिंह पर 3,43,78,300 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। बताया गया है कि यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 90.04 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अतिरिक्त संपत्ति किन माध्यमों से अर्जित की गई और उसका वास्तविक स्रोत क्या है।

छापेमारी के दौरान जांच टीम का मुख्य फोकस दस्तावेजी साक्ष्यों पर है। संपत्ति की खरीद-बिक्री, बैंक खातों, निवेश, जमीन और मकान से जुड़े कागजात के साथ-साथ आय और खर्च के रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। जांच के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में आर्थिक अपराध इकाई आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भी EOU ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े मामलों में कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाए हैं। जून 2026 में भी EOU ने एक सरकारी इंजीनियर से जुड़े ठिकानों पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी।

अजय कुमार सिंह से जुड़े मामले में भी जांच का दायरा सिर्फ एक स्थान तक सीमित नहीं रखा गया है। पटना में आवास और कार्यालय तथा बेगूसराय में पैतृक मकान को एक साथ जांच के दायरे में लेने का उद्देश्य संपत्ति से संबंधित अलग-अलग रिकॉर्ड को मिलाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाना माना जा रहा है।

EOU की कार्रवाई में अभी तक किसी अधिकारी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। फिलहाल तलाशी अभियान और दस्तावेजों की जांच जारी है। जांच एजेंसी को तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य साक्ष्य मिले, इसका विस्तृत विवरण कार्रवाई पूरी होने के बाद सामने आ सकता है।

गौरतलब है कि आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसी पहले अधिकारी की ज्ञात आय, वैध स्रोतों और घोषित संपत्तियों का आकलन करती है। इसके बाद संपत्ति और आय के बीच अंतर की जांच की जाती है। इस मामले में भी EOU द्वारा इसी आधार पर संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

हालांकि, किसी अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगना और अदालत में आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष तक इसे EOU का आरोप ही माना जाना चाहिए।

फिलहाल पटना और बेगूसराय में तीनों स्थानों पर जांच की कार्रवाई जारी है। तलाशी में सामने आने वाले दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड इस मामले की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।

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सरकारी पद पर बैठे किसी अधिकारी की संपत्ति और उसकी ज्ञात आय के बीच बड़ा अंतर सामने आना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल छापेमारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संपत्ति के वास्तविक स्रोत का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होता है।

EOU की मौजूदा कार्रवाई में तीन अलग-अलग ठिकानों को एक साथ जांच के दायरे में लिया गया है। इसका मतलब है कि जांच एजेंसी संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को अलग-अलग स्थानों से जुटाकर उनका मिलान कर रही है। जमीन, मकान, बैंक खाते, निवेश और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित अतिरिक्त संपत्ति किस स्रोत से आई।

लेकिन जांच के दौरान सामने आए आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा। किसी भी अधिकारी को अपनी बात रखने और न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जरूरी है।

बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि सरकारी पद का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने के लिए किए जाने के आरोपों की जांच गंभीरता से की जा रही है। अब इस मामले में तलाशी से मिले दस्तावेज और आगे की जांच ही तय करेगी कि आरोपों की वास्तविकता क्या है।

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